आचार्य कुन्दकुन्द

जैनाचार्यों का वनस्पति ज्ञान

प्राचीन काल से ही विभिन्न पुराणों, ग्रन्थों एवं साहित्यिक रचनाओं में वनस्पतियों का उल्लेख होता रहा है। इन वनस्पतियों का वर्णन औषधियों, सौन्दर्य प्रसाधन, कृषि, भवन, शृ्रंगार, वस्त्र, विधि— विधान, संस्कार, अनुष्ठान इत्यादि के रूप में किया जाता है। प्रकृति के अत्यन्त समीप होने से मनुष्य को वनस्पतियों के स्वभाव…

तत्वार्थ सूत्र प्रश्नोत्तरी–दशवीं अध्याय

प्र.१— तत्वार्थसूत्र की दशवीं अध्याय में किसका वर्णन है ? उत्तर— तत्वार्थसूत्र की दशवीं अध्याय में मोक्षतत्व का वर्णन है। प्र.२— केवलज्ञान की उत्पत्ति का क्या कारण है ? उत्तर— ‘‘मोहक्षयाज्ज्ञानदर्शनावरणान्तरायक्षयाच्चकेवलम्’’ मोहनीय कर्म का क्षय होने से अन्तर्मूहुर्त के लिये क्षीणकषाय नामक बारहवां गुणस्थान पाकर एक साथ ज्ञानावरण, दर्शनावरण और अंतराय कर्म…

तत्वार्थ सूत्र प्रश्नोत्तरी–नवम अध्याय

प्र.१. संवर का लक्षण क्या है ? उत्तर— ‘‘आस्रव निरोधः संवर:’’ आस्रव का निरोध करना संवर है। प्र.२. संवर के कितने भेद हैं ? उत्तर— संवर के २ भेद हैं :- (१) द्रव्य संवर (२) भाव संवर। प्र.३. संवर के हेतु कौन से हैं ? उत्तर— ‘‘स गुप्ति समिति धर्मानुप्रेक्षापरीषहजय चारित्रै:।’’ संवर गुप्ति, समिति,…

तत्वार्थ सूत्र प्रश्नोत्तरी–अष्टम अध्याय

प्र.१. बंध के कौन से कारण हैं  ? उत्तर — ‘मिथ्यादर्शनाविरति प्रमादकषाययोगा बंधहेतव:’ मिथ्यादर्शन, अविरति, प्रमाद, कषाय और योग ये बंध के हेतु हैं। प्र.२. मिथ्यादर्शन किसे कहते हैं ? उत्तर— मिथ्यात्व प्रकृति के उदय से सातों तत्वों के विपरीत श्रद्धान को मिथ्यादर्शन कहते हैं। प्र.३. अविरति किसे कहते हैं ? उत्तर—…

तत्वार्थ सूत्र प्रश्नोत्तरी–सप्तम अध्याय

प्र.१. पाप कितने और कौन से हैं ? उत्तर— पाप ५ होते हैं :— (१) हिंसा, (२) झूठ, (३) चोरी, (४) कुशील, (५) परिग्रह प्र.२. व्रत किसे कहते हैं ? उत्तर— ‘‘हिंसानृतस्तेयाब्रह्म परिग्रहेभ्यो विरतिव्र्रतम् ।’’ हिंसा, असत्य, चोरी, अब्रह्म और परिग्रह से निवृत्त होना व्रत है। प्र.३. हिंसा किसे कहते…

तत्वार्थ सूत्र प्रश्नोत्तरी–छठा अध्याय

प्र.१. योग किसे कहते हैं ? उत्तर— ‘‘कायवाङ्मन: कर्मयोग:’’ काय, वचन और मन की क्रिया को योग कहते हैं। प्र.२. आस्त्रव का लक्षण क्या है ? उत्तर— ‘‘स आस्रव:’’ तीन प्रकार का योग ही आस्त्रव है। प्र.३. आस्रव की परिभाषा कीजिये। उत्तर— कर्मों का आना आस्रव है। प्र.४. कर्म कितने प्रकार के…

तत्वार्थ सूत्र प्रश्नोत्तरी–पंचम अध्याय

प्र.१. पुदगल द्रव्य के कितने प्रदेश होते हैं ? उत्तर— ‘‘संख्येयाऽसंख्येयाश्च पुदगलानाम्’’।पुद्गलों के संख्यात, असंख्यात और अनंत प्रदेश होते हैं। प्र.२. अनंत संख्या किस ज्ञान का विषय है ? उत्तर —अनंत संख्या केवल ज्ञान का विषय है। प्र.३. परमाणु कितने प्रदेशी हैं ? उत्तर — ‘‘नाणो:’’ परमाणु के प्रदेश नहीं होते। प्र.४. संसार…

तत्वार्थ सूत्र प्रश्नोत्तरी–चतुर्थ अध्याय

प्र.१. देव कितने हैं ? बताईये। उत्तर — ‘‘देवाश्चतुर्णिकाया:’’। देव चार निकाय वाले हैं प्र.२. देव कौन कहलाते हैं ? उत्तर — देवगति नामकर्म के उदय होने पर जो नाना प्रकार की बाह्य विभूति सहित द्वीप समुद्रादि स्थानों में इच्छानुसार क्रीड़ा करते हैं वे देव होते हैं। प्र.३. निकाय शब्द से क्या…

तत्वार्थ सूत्र प्रश्नोत्तरी–तृतीय अध्याय

प्र.१. नारकी जीव कहाँ रहते हैं ?                    उत्तर— नारकी जीव अधोलोक की सात भूमियों में रहते हैं । प्र.२. नरक की भूमियों के नाम बताईये ? उत्तर—‘‘रत्नशर्कराबालुकापंकधूमतमोमहातम: प्रभाभूमयो घनाम्बुवाताकाश प्रतिष्ठा: सप्ताधोऽध:।’’ रत्नप्रभा, शर्कराप्रभा, बालुकाप्रभा, पंकप्रभा, धूमप्रभा, तमप्रभा, तथा महातमप्रभा ये सात नरक की भूमियाँ हैं और क्रम से नीचे—नीचे घनोदधिवातवलय, घनवातवलय, तनुवातवलय,…

तत्वार्थ सूत्र प्रश्नोत्तरी–द्वितीय अध्याय

प्र.१. जीव के असाधारण भाव (स्वतत्व) के नाम बताओ ? उत्तर— १. औपशमिक, २. क्षायिक, ३.मिश्र, ४. औदयिक और पारिणामिक ये ५ भाव जीव के स्वतत्व अथवा असाधारण भाव है। प्र.२. औपशमिक भाव से क्या आशय है ? उत्तर— कर्मों के उपशम से आत्मा का होने वाला भाव औपशमिक भाव है। प्र.३….

तत्वार्थ सूत्र प्रश्नोत्तरी–प्रथम अध्याय

प्र.१. मोक्षमार्ग क्या है ? सूत्र लिखिये । उत्तर — सम्यग्दर्शन ज्ञान चारित्राणि मोक्षमार्ग:। प्र.२. सूत्र का अर्थ स्पष्ट कीजिये ? उत्तर — सम्यग्दर्शन, सम्यक्ज्ञान और सम्यक् चारित्र तीनों की एकता ही मोक्षमार्ग है। प्र.३.मोक्ष क्या है ? उत्तर — आत्मा का हित अथवा अष्ट कर्मों से रहित होना मोक्ष है। प्र.४. मोक्ष का स्वरूप क्या…

जैन महाभारत –Part2

श्री वसुदेव वसुदेव का देशाटन— राजा समुद्रविजय ने अपने आठों भाइयों का विवाह कर दिया था, मात्र वसुदेव अविवाहित थे। कामदेव के रूप से सुन्दर वसुदेव बालक्रीड़ा से युक्त हो शौर्यपुर नगरी में इच्छानुसार क्रीड़ा किया करते थे। तब कुमार वसुदेव को देखने की इच्छा से नगर की स्त्रियों की बहुत…